जनकपुृरधामक भूमिसँ निकलल बलिउडमे स्थापित

प्रवेश मल्लिक मैथिली हिन्दी गीत संगितके चर्चित नाम । जनकपुृरधामक भूमिसँ निकलल यी प्रतिभा बहुत छोट समयमे बलिउडमे स्थापित होबए सफल भेल अछि । प्रवेश बलिउडमे सफल रहितो अखनो एहि जदोजहदमे ओ लागल छथि । तथापि प्रवेश मुम्बईमे रहियो कऽ अप्पन माटि पानि प्रती समर्पित छथि जे हिनकर प्रमुख विशेषता छन्हि ।

मैथिली गीत संगितके अन्तर्राष्ट्रिय जगतमे स्थापित कराबएमे लागल प्रवेशक जन्म १ जुलाई १९८० मे नेपालक धनुषा जिल्लाक वभनगामामे भेल छन्हि । वभनगामा विद्यालयसँ विद्यालय शिक्षा हासिल कएने प्रवेश मोनाष्टिक विद्यालयसँ उच्च माध्यमिक तहके पढाइ कएलन्हि ।

प्रवेशके संगीत विरासतमे भेटल छन्हि । हुन पैघ भाई सुनिल मल्लिक मैथिलीक प्रसिद्ध संगीतकार एवं गायक छथि । हुनक घरेके वातावरण संगीतमय रहलाक कारण प्रवेशक नश नशमे संगीत छन्हि । घरक माहौल संगीतमय रहलाक कारण बच्चेसँ ओहो संगीत विधामे सीक्का जमाबएके सपना देखए लगलैथि । मुदा पिताक ईच्छा रहन्हि बेटा डाक्टर वा इन्जिनियर बनए ।

पिताक ईच्छा अनुरुप ओ एमबिबिएस अध्ययनक लेल बंगलादेशधरि पहुँच गेलथि । मुदा संगीतक नशा लागल प्रवेशके ई पढाई आकर्षित करए नहि सकल । अतः ओ फेरसँ संगीतेके छायाँमे पिताक डाँटके बादो रहएके निर्णय कएलथि ।

संगीतक पुजारी प्रवेश छौरा तोरा बज्जर खसतौ, मैयाँ भवानी बिन्ती सुनु, हम्मर ध्क्क धक्की बढैया, नेपाली गीति एलबम मुटु भरी माया सहित दर्जनो एल्बममे संगीत तथा आवाज दऽ चुकल छथि ।

प्रवेशक संगीतक यात्रा साथी संगी सभके संगतमे शुरु भेल । हुनक मित्रसभ कृष्णा , घनश्याम मिश्र आ ललित कामत लगायत गीत लिखैथि आ ओहिमे संगीत भरएके काज करैत छलाह ।

संगीतमे रुचि रखितो पिताक दवाब रहन्हि डाक्टर बनए मुदा साहित्यकार अशोक दत्त हुनक पिता कामेश्वर मल्लिकके कन्भिन्स करएके प्रयास कएने बात प्रवेश बतौलन्हि । तकर बाद मात्रे प्रवेशक औपचारिक रुपमे संगीतक यात्रा शुरु भेल ।

सन २०००मे ओ संगीतक पढाई करबाक उद्देश्यसँ दिल्ली प्रस्थान कएलन्हि । सन २०१३धरि ओ दिल्लीस्थित गन्धर्व बिश्वबिद्यालयमे २०१३ धरी संगीत सिखलथि । एहि अवधिमे ओ दिल्ली बिश्वबिद्यालयसँ संगीत शिरोमणी आ स्नातकोत्तर सेहो कएलन्हि ।

दिल्लीमे अध्ययनरत रहल समयमे प्रवेश अप्पन खर्च जुटेवाक लेल धार्मिक जागरण करए लगलथि । ओहिसँ हुनका ५०० सय रुपैयाँ भेटैन्हि जाहिमेसँ १ सय रुपैयाँ किबोर्ड जम्मा करैथि । तथापि किबोर्ड बादमे हुनके पिता किन देलथि ।

हुनक आवाज जादुक असर तखन लोकके बुझवामे आएल जखन ओ बृन्द गान, सामुहिक गानमे सुनवामे आाएल । दिल्लीमे रहैत काल ओ सानिध्य बैण्डक स्थापना कएलन्हि । एहि बैण्डक माध्यमसँ ओ देश विदेशमे कार्यक्रमसभ करए लगलथि ।

एहि संगे आय आर्जनक लेल दिल्लीक स्टेप बाइ स्टेप स्कुलमे संगीत शिक्षकके रुपमे काज करए लगलथि । संगीत जगतमे स्थापित करएके प्रयास कइए रहल समयमे हुनक विवाह अमृता मल्लिकसंग भेल ।

विवाहक बाद पत्नी अमृताक संग फेरसँ दिल्ली गेलथि । पत्नी अमृता हुनक संगीतक बहुत बडका कायल छलीह । हुनके सुझाव अनुरुप अपन संगीतके पाँखिके उडान देबएके उद्देश्यसँ मुम्बईक लेल प्रस्थान कएलन्हि ।

प्रवेश कहलथि दिल्लीमे स्थापित जीवन आ नोकरीए देखि ‘विवाह भेल रहे सेहो कोना छोरी ताहि बातक चिन्ता ‘ रहन्हि । एहि गुनधुनीक बिच ओ पत्नी अमृताक बात मानि मुम्बईके लेल प्रस्थान कएलन्हि । शुरुमे मुम्बईमे रहनाई हुनका लेल बहुत कठीन भेलन्हि नहि कोनो चिन्हजान भेलाक कारण ।

एहि बिचमे हुनक भेट बलिउडक स्थापित निर्देशक प्रकाश झाक नजदिकी सन्तोष मण्डलसंग भेलन्हि । ओहि समयमे प्रकाश झा गंगाजल फिल्मक पार्ट २ जय गंगाजल बना रहल छलथि ।

ओहि बिचमे प्रवेशके भेट प्रकाश झासंग भेल । प्रकाश झा ३ दिनक समय द ६ टा गित देल्कैन्ही आ ओ १८ टा बनैलैथ जाहिमेस १२ ट गित हुन्कर लेल्गेल ।

ओ तैयार कएने संगीतमे सँ १२ टा संगीत छनौट कएल गेल । प्रवेशक गीत डन्का उसका बाजेगा, सैया धिरे धिरे, जेहन गीत बलिउडक बडका पर्दापर हिट रहल ।

बादमे बरेलिकी बर्फी, जावरिया जोडि, तानाशाह, तकलेश्वर, सहित नेपाली फिल्ममे सेहो हुनकर गीत आ संगीत आइ एम भेरी सरि बहुत बेसी धमाल मचौलक ।

मैथिलीमे संगीत देनाई ओ बन्द नहि कएलनिह । ओ मुखिया जी, प्रेमक बसात, मिथिला मखान, एल्बम सभ “लेहुआयल आँचर, खोता श्रृङ्गार, होली गित परदेशिया, जुलुम करे ना अखन युट्युव पर धमाल मचा रहल अछि ।

साभार/सौर्य मिथिलासंगक’ बातचित