Thu. Oct 29th, 2020

कवि युद्ध (कविता )

कविताके टक्करमे कविता
नई शेर हमर सेराएल अई
बचपनके बाद अबइय जे
ओ फेर जुआनी आएल अई

तिरनके काटे तिर जेना
रामायण आ महाभारतमे
किया कहु हम ओहे भाव
हमरो मनमे आएल अई

जाबत उपजत नई द्वन्द भाव
ताबत ने आगु कलम चलत
अपने मनमे अई प्रतिद्वन्दी
ई ओकरे उपजाएल अई

ज्ञानहीन नई बुझि सकत
ज्ञानीके लेल जरुरी थिक
अई तिर चलल अन्तर मनसँ
लागइय मन ई घायल अई

नई अर्थहीन किछु बात करब
सार्थक बात जरुरी थिक
तर्क कुतर्कमे दिवस गवाँ
नई भाव अभावमे आएल अई

कवि: काशीकांत झा